Thursday, November 10, 2011

Rajput Poem - Rajputana

Dear All Readers.

Being born in a Rajput Chauhan Family is one of the biggest pride i ever had since. So today I am dedicating a poem to all my Rajput brother's and sister's. I hope you will love it and get inspired too. For my English reader's - sorry i am unable to bring the same in English for the time being but you can go through a brief about the poem at the end.





अक्शर अचाई का रास्ता गंदिगी से हो कर गुजरता है।
अगर कुछ अच्हा करना है तो गंदिगी को ख़तम करना होगा।।
कुछ करना है अगर तो कीचड़  में खुदना ही होगा।
अगर किसी को न्याय देना है तो आज लड़ना ही होगा।।


अगर अब नहीं आगे बढ़ेंगे तो ज़िन्दगी भर लाइन में लगना ही होगा।
अगर आज कीचड़ साफ नहीं किया तो कल दलदल में फसना ही होगा ।
अगर आज कुछ नहीं किया तो कल रोना ही होगा।।


अगर अब बैठे रह गए तो ज़िन्दगी भर रोना होगा।
अगर आज आंखे नहीं खोली तो ज़िन्दगी भर आंखे बंद रखनी होगी।।
अगर आज कान बंद कर लिए तो ज़िन्दगी भर शोर सहेना होगा।
अगर आज नहीं जागे दोस्तों तो ज़िन्दगी भर सोना पड़ेगा ।।


उठो जागो अन्याय के आगे आज तलवार उठालो।
तोड़ दो आज सारी ज़ंजीरो को, बता दो इन चोरो को।
बता दो इस दुनिया को की हम रणवीर है।
बता दो की हम रंजित है।।


हम आज भी वही ताकत रखते है।
अपनी प्यास पानी से नहीं बल्कि शोनित से बुजाते है।
आज भी हम जब ललकार उठाते है तो शेर भी अपनी दुम दबाते है।।


तोड़ दो सारी ज़ंजीरो को, तोड़ दो इन बंधन को. आज जीत्लो इस दुनिया को।
सिखा दो इस दुनिया को की सिधांत क्या होते है।
आज बता दो की आदर्श क्या है।।


दिखा दो सबको की सब्दो के मोल क्या होते है ।
दिखा दो सबको की राज केसे करते है ।
सिखा दो सबको की जीवन मृत्यु क्या है।
आज बता दो इनको की एक राजपूत क्या है।
आज बता दो इनको की एक राजपूत क्या है।।

-  नवनीत सिंह चौहान 

The poem invites all Rajputs who believe in the basic principles of our generations - "Truth and Honesty" to unite and fight against the problems/issues in our existing system like corruption and injustice to bring in better India. The fight may be in form of forming a political party and ruling the nation in it's modest form like once God Rama ruled the nation.

Hope you all would have enjoyed reading it.

Will love to hear your views on the same.

Jai Mata Di....!
Jai Rajputana....! 

You might also like " Rajput Poem - शूरवीर राजपूत "
Regards,
Navneet Singh Chauhan.

17 comments:

  1. jai mata di...!

    jai rajputana..!

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  2. Jai Mata Di Ankit banna.
    Jai Rajputana.

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  3. mast hai bhai..........

    RAJPUTS ROYAL...........

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  4. Thanks Shobhit. :)
    Yeah Royal Rajputs.

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  5. Nitinraj4930 March, 2012

    cool poem its giving me a royal feeling.................................

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  6. th. sachin singh raghav30 March, 2012

    chauhan sahab kush kar diya aapne...
    agar aap f.b par ho to friend request jarur bhejna yaar.
    sraghav.10gmail .com
    jai maharana pratap.
    jai rajputana

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  7. Thanks Sachin-Ji.
    mene apko request bheji hai. Do check it.
    Jai Maharana Pratap.
    Jai Rajputana.
    Jai Mata Di. 

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  8. Thanks Nitin.
    Glad to hear that you got royal feeling after reading my poem rajputana.
    :)

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  9. dil m josh bada diya chauhansa really great lines.....


    ravinder singh udha rathore unadi

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  10. Thanks banna hukum.

    Jan kar acha laga ki meri kavita ne apke dil me josh bhar diya.Jai Rajputana.

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  11. jai rajputana

    Shailendramca90gmail.com

    Shailendra Rajput   Facebook name

    Send me request rajput ji.................

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  12. Jay Rajputana
    bhai khoon khol uthata hai apki poem padhar,,,,send req

    jamadar.harsh@gmail.com
    facebook name
    Harshsing jadhav


    Jay Rana Pratap
    Jay Mata Di
    Jay Rajputana

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  13. YA shi bat boli bhai thane jay rajputana

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  14. एक गाँव मे गाँव के ठाकुर साहब के यहा शादी का कार्यक्रम चल रहा था । तो हुकुम आप तो जानते ही हे सा की हमारे (राजपूतो) के यहा शादी हो और पेक-सेक ना चले ये तो हो ही नही सकता ।
    तो सभी बडे-बडे राव साहब, ठाकुर साहब और सभी बन्ना हुकुम महफील का आनन्द ले रहे थे ।
    संगीत चल रहा था । ओर गाने बजाने वाले गीत गा रहे थे। एक गाने वाला गाने लगा "जब जब देखू बना री लाल पीळी अखीयाँ मैँ कोनी डरु सा बलाई काडो अखीयाँऽऽऽऽ......"
    तभी एक बना हुकुम को थोडी चढ गयी वो ऊठे और गाने वाले आदमी के पास जाकर उसके एक जोरदार थप्पड जड दीया।
    अब वो ठहरे वहा के जमाईसा अब उन्हे कोन कहने वाला।
    तभी वो बोले "थू नी डरे थू अबार डरेलो"
    और जाकर अपने स्थान पर बैठ गये।
    तभी गाने वाले ने गाना शुरू किया,
    "जब-जब देखू बना री लाल पीळी अखीयाँ मैँ घणो डरु सा थै मती काडो अखीयाँ....,"
    देखा बन्ना हुकुम का फटका एक ही बार मे पूरा का पूरा गाना ही चेन्ज कर दिया....!
    कुँ.गजेन्द्र सिँह शक्तावत मेँवाड

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  15. GREAT YAAR WHAT A POEM YAAR

    REALLY I PROUD TO BE A RAJPUT


    JAI MAHARANA PRATAP
    JAI PRITHVIRAJ CHAUHAN
    JAI RAJPUTANA

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